कश्मीर 24 अगस्त 2026

ब्लड प्रेशर और डिप्रेशन की दवाएं लेते हैं तो इन बातों का ख़्याल रखिए

ब्लड प्रेशर और डिप्रेशन की दवाएं लेते हैं तो इन बातों का ख़्याल रखिए

लॉस एंजिलिस में 36 साल की करियर कोच कैरोलीन फ्रैसेनेट पर जुलाई की उमस भरी हीटवेव में तीन अलग-अलग साइकियाट्रिक दवाओं एंटीडिप्रेसेंट, मूड स्टेबलाइज़र और एडीएचडी का मिला-जुला असर पड़ा। ध्यान केंद्रित करने में मुश्किल, चिड़चिड़ापन, सामान्य से ज़्यादा पसीना। उन्हें लगा खान-पान या पानी की कमी है तब तक जब तक उनके मेंटल हेल्थ सपोर्ट ग्रुप के दोस्त ने गर्मी और दवाओं के बीच कड़ी बताने वाले लेख नहीं भेजे। लास वेगास में 43 डिग्री गर्मी में एक 60 साल का व्यक्ति पार्क में बेहाल मिला पीला चेहरा, तेज़ पसीना, बढ़ी हुई हार्ट रेट। वो डाइयूरेटिक और एसएसआरआई दोनों ले रहा था। उसे अंदाज़ा ही नहीं था कि उसका शरीर कितना गर्म हो चुका है।

जलवायु परिवर्तन के साथ हीटवेव बार-बार और ज़्यादा तीखी होती जा रही हैं। लेकिन जो बात अभी तक चर्चा में नहीं आई और जो इस रिपोर्ट का केंद्र है वो यह है कि करोड़ों लोग रोज़ाना ऐसी दवाएं ले रहे हैं जो शरीर के अंदरूनी थर्मोस्टेट को ही बिगाड़ देती हैं। ये दवाएं हाइपोथैलेमस पर असर डालती हैं दिमाग़ का वो हिस्सा जो शरीर का तापमान कंट्रोल करता है, पसीना नियंत्रित करता है, और गर्मी से बचाव के लिए मेटाबॉलिज्म घटाता है। जब ये तंत्र बाधित होते हैं, तो सामान्य गर्मी भी जानलेवा बन सकती है और इंसान को पता भी नहीं चलता कि उसका शरीर खतरे में है। सबसे बड़ा खतरा यह है कि लोगों को इस संबंध का पता ही नहीं है। डॉक्टर भी दवा लिखते वक्त गर्मी के जोखिम की चर्चा नहीं करते। और जो लोग कई दवाएं एक साथ ले रहे हैं खासकर बुजुर्ग उन पर खतरा कई गुना बढ़ जाता है। यह सिर्फ मेडिकल मुद्दा नहीं है यह उस जलवायु संकट का वो पहलू है जिस पर अभी तक किसी का ध्यान नहीं गया।

  • एंटीडिप्रेसेंट (SSRI और SNRI) हाइपोथैलेमस में सेरोटोनिन का स्तर बढ़ाकर शरीर के तापमान नियंत्रण में बाधा डालते हैं।
  • एंटीडिप्रेसेंट लेने वाले हर पांच में से एक व्यक्ति को अत्यधिक पसीना आने की समस्या होती है।
  • अत्यधिक पसीने से इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी होती है, जो गर्मी में पहले से मौजूद डिहाइड्रेशन को और गंभीर बनाती है।
  • ट्राइसाइक्लिक एंटीडिप्रेसेंट का एंटीकोलीनर्जिक प्रभाव पसीने को रोककर या बढ़ाकर दोनों तरह से शरीर का तापमान बिगाड़ सकता है।
  • एंटीसाइकोटिक दवाएं (स्किज़ोफ्रेनिया, बाइपोलर के इलाज में) हाइपोथैलेमस में डोपामाइन को रोककर शरीर की कूलिंग प्रतिक्रियाएं बंद कर देती हैं।
  • पिछली हीटवेव पर हुई स्टडीज़ में एंटीसाइकोटिक दवाओं और मौत के बढ़े जोखिम के बीच सीधा संबंध पाया गया है।
  • एडीएचडी की स्टिमुलेंट दवाएं (जैसे रिटालिन) शरीर की गर्मी बढ़ाती हैं और रक्त वाहिकाओं को सिकोड़कर ठंडा होने की प्रक्रिया बाधित करती हैं।
  • बीटा-ब्लॉकर्स त्वचा तक रक्त प्रवाह कम करते हैं, जिससे शरीर गर्मी बाहर नहीं निकाल पाता।
  • डाइयुरेटिक्स, एसीई इनहिबिटर्स और एआरबीएस शरीर में इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बिगाड़ते हैं और प्यास लगने के संकेत वाले हार्मोन को प्रभावित करते हैं।
  • इन दवाओं के मिले-जुले असर से किडनी फेल, हार्ट अटैक और अंगों को गंभीर नुकसान का खतरा बढ़ जाता है।

ये दवाएं ये शरीर के तापमान को नियंत्रित करने की क्षमता पर असर डाल सकती हैं और लोगों में गर्मी से जुड़ी बीमारियां होने की वजह बन सकती हैं.